रामचरितमानस की मंगल आरती गाओ...

रामचरितमानस की, मंगल आरती गाओ। 
नयनराम सियरघुवर छवि के दर्शन पाओ। 

अधर अरुण सरसिज छवि छाए
परिमललुब्ध भक्त अलि धाए। 
मृगनयननि मृदु चितवनि पाए
वारहि प्रान आन हरषाए। 
मोहनि छवि चित लाकर जीवन सफल बनाओ। 
रामचरितमानस की…

हाटक मुकुट सुभग सिर साजै
सखि मणि लखि अगनित रवि लाजै। 
कुण्डल श्रवण अलक लटकाजै
निरखि अपछरा रति हिय छाजै। 
कोटि काम कमनीय निरख सब वैभव लाओ। 
रामचरितमानस की…

वेदपुराण सुसम्मत बानी
निगम निगद सब विषय बखानी। 
भव मनभावनि सुनत भवानी
भवभय भंजन इति जग जानी। 
पढ़त मनन मन करि करि संसय छाड़ि भगाओ। 
रामचरितमानस की…

रामकथा सुन्दर करतारी
संसय बिहग उडावनहारी। 
चारि वर्ण बालक अरु नारी
बृद्ध पढ़हि सब होहि सुखारी। 
जीव जंतु सुनि नित हिय से संताप मिटाओ। 
रामचरितमानस की…

नारद धरे दीप अरु बाती
सारद मगन सकल सुर गाती। 
अब प्रभु कृपा करहु एहि भाँती
सब तजि भजनु करौं दिनराती। 
मनभावन छविधाम हृदय रति राम बढ़ाओ। 
रामचरितमानस की…

तुलसी रचे नेह अधिकाए
जासु न कोउ ताहि अपनाए। 
भावसहित जो आरति गाए
सकल मनोरथ सुभ फल पाए। 
‘कौशलेन्द्र’ नित गावत आरति हरिपुर जाओ। 

रामचरितमानस की, मंगल आरती गाओ। 
नयनराम सियरघुवर छवि के दर्शन पाओ। 

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