आरती उतारूँ त्रिपुरारी दुलहा के

सखि हे आरती उतारू त्रिपुरारी दुलहा के
त्रिपुरारी दुलहा के ई कैलाशी पहुना के
सखि हे...

सर्प के हार अरु मुण्ड लर मोती हे
जटा जूट साफा सोहे भाल चन्द्र जोती हे
एती चरन महावर कर कंगन दुलहिन के
सखि हे...

जामा मृग छाल देखूँ चाल मतवारी
भूतवा परेत नाचैं बैल की सवारी
सोहे मथवा त्रिपुंड हे चिता भस्म दुलहा के
सखि हे...

मंद मुसकान लटे बिच्छा कान कान में
नाही देखी दुलहा अइसन सकल जहान में
तबो बलिहारी हे री भोलवा दुलहा के
सखि हे...

कहे कौशलेन्द्र धन भाग हिमवान हे
आए जो भंडारी जाके बने महमान हे
अइसे बांधूँ छूटे ना गठबंधन दुलहा के
ओ त्रिपुरारी दुलहा के भोले भंडारी दुलहा के
सखि हे...


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